Maa

March 19, 2018

maa

एक बार फिर घर जाने को जी चाहता है।
उन्ही नन्हे हाथों से रेत के टीले बनाने को जी चाहता है
वही बेमतलब की कलाकारी दीवारों पर करके,
उसे देखकर खुशी से झूम जाने को जी चाहता है।
एक बार फिर माँ के पास जाने को जी चाहता है।

माँ के साथ बैठकर खिल खिलाने को जी चाहता है।
घर-घर खेलकर माँ बन जाने को जी चाहता है।
माँ को परेशान करकर उसी की हाथ की रोटी खाने को जी चाहता है।
एक बार फिर उसकी डाँट खाने को जी चाहता है।
एक बार फिर माँ के पास जाने को जी चाहता है।

 

maa

पापा की नन्ही परी बनने को जी चाहता है।
पापा से रूठकर मूँह फुलाने को जी चाहता है।
फिर से "पापा जादूगर" को देखने को जी चाहता है।
फिर से पापा की गोड मैं सर रखकर सोने को जी चाहता है।
एक बार फिर माँ के पास जाने को जी चाहता है।

माँ के साथ छत पर बैठकर तारे गिनने को जी चाहता है।
पापा के साथ चांद तोड़ कर लाने को जी चाहता है।
उस बारिश में भीग जाने को जी चाहता है,
कागज़ की कश्ति को तैरा देने को जी चाहता है।
एक बार फिर माँ के पास जाने को जी चाहता है।

वो सुबह-सुबह स्कूल जाने को जी चाहता है।
अपने डब्बे में रोज कुछ नया खाने को जी चाहता है।
अाते ही माँ को होमवर्क दिखाने को जी चाहता है।
फिर सैैर पर निकल जाने को जी चाहता है।
एक बार फिर माँ के पास जाने को जी चाहता है।

माँ तूने भेज तो दिया खुद से दूर,
कभी कभी सोचती हूँ ,तेरा मुझे वापस बुलाने को जी चाहता है।
जब डगमगाते है कदम,
साथ में पापा को देखने का जी चाहता है।
एक बार फिर माँ आपके पास आने को जी चाहता है।

माँ बुला ले मुझे अपने पास,
एक बार फिर तेरी डाँट सुनने को जी चाहता है।
पापा के साथ फुर्रर् हो जाने को जी चाहता है।
बचपन के उन दिनों को फिर से जीने को जी चाहता है।
एक बार फिर से माँ आपके पास आने को जी चाहता है।

Written by: Vocal Jain

 

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